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ज्योतिष परिचय,उपयोगिता एवं लाभ

ज्योतिष परिचय, उपयोगिता एवं लाभ

ज्योतिष के बारे में जब भी हम सुनते हैं तो मन में अनेक प्रकार के प्रश्न उत्पन्न होते हैं कि ज्योतिष क्या है? इसकी उत्त्पति कहाँ से हुई ? ज्योतिषीय गणनाओं का मूल आधार क्या है ? ज्योतिष कैसे और किस –किस क्षेत्र में मानव मात्र के लिए लाभकारी हो सकता है ? इन सभी प्रश्नों का उत्तर प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए और ज्योतिष सम्बन्धी संशयों को दूर करने के लिए सिल्वर लाइनिंग टीम दिल्ली ने शिक्षाविद् और प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ.नवीन शर्मा से बातचीत की l
प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश :-
1. ज्योतिष क्या है ?
सृष्टि के आरम्भ से ही वेद हमारे ज्ञान के मूल हैं जो विज्ञान से परिपूर्ण हैं l वेदों का ही एक अंग ज्योतिष है,यह प्राणी मात्र के जीवन का नेत्र माना जाता है l वेदकाल से ही ज्योतिष की उत्पत्ति हुई है l इसे वैदिक ज्योतिष के नाम से भी जाना जाता है, अत: कहा जा सकता है कि ज्योतिष एक ऐसा शास्त्र या विज्ञान है जो जन्मकालिक ग्रह और नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार आकाश मंडल में विचरने वाले ग्रहों जैसे सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहू और केतु के साथ 12 राशियों और नक्षत्रों का गणितीय अध्ययन करता है और इन्हीं आकाशीय तत्वों से पृथ्वी और पृथ्वी पर रहने वाले लोग किस प्रकार प्रभावित होते हैं, उनका विश्लेषण भी गणितीय विधि से करता है,इसका मूल आधार गणित है l आर्यभट्ट, भास्कराचार्य और वराहमिहिर प्रारम्भिक ज्योतिषी हुए हैं l

2. ज्योतिष किस प्रकार से मानव मात्र के लिए लाभकारी हो सकता है ?
वैदिक ज्योतिष द्वारा अपना भविष्य जानने के लिए आपको अपना जन्म दिनांक-मास-वर्ष,जन्म समय और जन्म स्थान का सटीक ज्ञान होना परमावश्यक है l जितना सटीक आपका डाटा होगा,उतना ही सटीक आप अपने भविष्य के बारे में अपने प्रत्येक प्रश्न का उत्तर जान पाएंगे l
ज्योतिष के माध्यम से समय से पहले यदि आपको अपने वर्तमान और भविष्य के बारे में में पूर्वानुमान लग जाता है तो आप अपने कार्य क्षेत्र में परिस्थितियों के अनुसार उन्नति पाते हैं l यदि ज्योतिष के अनुसार वर्तमान या भविष्य की स्थितियां आपको नकारात्मक लग रही हैं तो आप आध्यात्मिक शक्ति,ध्यान और मन्त्र साधना आदि उपायों के द्वारा परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाने का प्रयास कर सकते हैं l यदि ज्योतिष के द्वारा आपको आपका भविष्य उज्जवल बताया जा रहा है तो आप समय से पहले उस उत्तम और सकारात्मक समय का लाभ उठाने के लिए पूर्ण रूप से क्रियाशील होकर फल में खूब वृद्धि कर सकते हैं l
 

3. क्या ज्योतिषीय उपायों से नकारात्मक समय को बदला जा सकता है ?
 समाज में एक कहावत प्रचलित है कि होनी को कभी टाला नहीं जा सकता और जो जिसके भाग्य में लिखा है वह होकर रहेगा और जो भाग्य में नहीं है वह आकर भी चला जाएगा परन्तु इससे भी बड़ा सत्य यह है कि ईश्वरीय सत्ता और ज्योतिषीय उपाय हर असम्भव काम को सम्भव बना सकते हैं l इस दुनिया में प्रत्येक वस्तु, ज्ञान और मन्त्र शक्ति का भी अपना प्रभाव और महत्व है, बिना महत्व के कुछ भी नहीं है, इसलिए जितने भी ज्योतिषीय उपाय हैं उनका अपना प्रभावपूर्ण महत्व है वे उपाय प्रत्येक मनुष्य को लाभ प्रदान करते हैं l
भाग्य में लिखा है बीमार पड़ना और हम बीमार भी पड़ते हैं परन्तु हम सही होने के लिए औषधि (दवाई) का सेवन भी करते हैं और हमें दवाई के सेवन से लाभ भी होता है और हम ठीक भी हो जाते हैं परन्तु हम शारीरिक रूप से ठीक होते हैं l
मानसिक रूप से हम रोगी ही रहते हैं, हम मानसिक रूप से भी पूर्ण रूप से स्वस्थ हों इसके लिए आध्यात्मिक शक्ति,ध्यान और मन्त्र साधना आदि ज्योतिषीय उपायों का सहारा लिया जाता है l मानसिक रूप से यदि व्यक्ति स्वस्थ है तभी वह पूर्णत: शारीरिक रूप से स्वस्थ हो सकता है l
 

4. ज्योतिष के क्षेत्र में समाज में कई तरह के पाखण्डी बैठे हैं इसलिए ऐसी परिस्थिति में विश्वास कैसे करें और सटीक भविष्य जानने के लिए किसके पास जाएँ ?
जब हम बीमार होते हैं तो डाक्टर के पास जाने से पहले हमें ये जरूर पता होना चाहिए कि डाक्टर किस स्तर का है ? डाक्टर की शिक्षा क्या है ? यदि हम स्पेशलिस्ट के पास अपना चेक अप करवाते हैं तो हमें सही समय पर सही मार्गदर्शन के द्वारा सही दवाई दी जाती है, ठीक उसी प्रकार ज्योतिष के क्षेत्र में भी भविष्य जानने से पहले हमें एस्ट्रोलाजर की शैक्षिक प्रोफाइल पता होनी चाहिए l उच्च शिक्षा प्राप्त अनुभवी ज्योतिषी हमारा अच्छा मार्गदर्शन और सटीक भविष्यवाणी कर सकता है l अत: अपनी विवेक बुद्धि से हमें उत्तम मार्गदर्शन हेतु अपने एस्ट्रोलाजर का चयन करना चाहिए l हमें दिखावा करने वाले धूर्त और पाखण्डी लोगों से बचना चाहिए l
ज्योतिष के द्वारा गणितीय विधि के द्वारा पहले ही बता दिया जाता है कि कब,किस तिथि को ग्रहण होगा ? कब आकाश में उल्कापात होगा ? पुच्छल तारा कब निकलेगा ? आदि अनेक उदाहरण हैं जिनके द्वारा ज्योतिष पर विश्वास करना सहज है l

5. ज्योतिष के द्वारा क्या-क्या जाना जा सकता है ?
ज्योतिष के द्वारा भूत, भविष्य,वर्तमान के बारे में पूर्वानुमान लगाया जाता है l जीवन में कब-कब हमारा स्वास्थ्य कैसा रहेगा ? इनकम कैसी रहेगी ? हमारा प्रभाव और नाम कैसा रह पायेगा ? जीवन में माता-पिता-स्त्री का सुख कैसा रहेगा ? विद्या और संतान कैसी होगी ? मित्र और शत्रु कहाँ तक हमें सहयोग और नुकसान पहुंचा सकते हैं ? भाग्य कितना साथ देगा ? जॉब या कैरियर कैसा रहेगा और उसमें कितनी उन्नति हो पाएगी ? बैंक बैलेंस कैसा रहेगा ? लव मैरिज होगी या अरेंज ? बिजनेस में इन्वेस्टमेंट करें या नहीं ?
ऐसे आपके जीवन से जुड़े हर सवाल का जवाब आप समय से पहले ज्योतिष विद्या के द्वारा ही पा सकते हैं और उन्नति में अद्भुत प्रगति कर सकते हैं l आज के समय में फिल्म इंडस्ट्री हो या मनिस्टरी, अध्यापक हो या बिज़नेस मैन, इंजीनियर हो या वकील सभी विवेकशील व्यक्ति एक विद्वान ज्योतिषी की गाइडेंस में रहते हुए उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं और हर क्षेत्र में सफलता पाते हैं l इस लेख के माध्यम से आपको ज्योतिष के परिचय के साथ ही ज्योतिष सेवाओं का लाभ उठाने हेतु दिव्य दृष्टि मिलने में सहयोग मिलेगा l जनसामान्य तक ज्योतिष परिचय और ज्योतिष भ्रान्तियों को पहुँचाने हेतु यह प्रभावशाली प्रयास किया गया है l आशा है लेख पढने वाले पाठक इससे अवश्य लाभान्वित होंगे l
Regards
Astrologer Dr.Naveen Sharma
(M.A,M.Ed,Ph.D. in Astrology)
Contact : 9650834736 /56

क्या आप मांगलिक हैं

मांगलिक दोष

मंगल उष्ण प्रकृति का ग्रह है l  इसे पाप ग्रह माना जाता है, विवाह और वैवाहिक जीवन में मंगल का अशुभ प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देता है l  मंगल दोष या मांगलिक योग जिसे मंगली के नाम से जाना जाता है इसके कारण कई स्त्री और पुरूष आजीवन अविवाहित ही रह जाते हैं l किन्तु विभिन्न स्थानों पर मंगल के होने से विभिन्न प्रभाव उत्पन्न होते हैं,जरुरी नहीं कि हर मांगलिक की स्थिति एक जैसी हो | इस योग को गहराई से समझना आवश्यक है ताकि इसका भय दूर हो सके |

 

मंगली दोष का ज्योतिषीय आधार

 

वैदिक ज्योतिष में मंगल को लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में दोष पूर्ण माना जाता है l इन भावो में उपस्थित मंगल वैवाहिक जीवन के लिए अनिष्टकारक कहा गया है | यद्यपि यह अन्य ज्योतिषीय योंगों की तरह ही योग हैं किन्तु इनके दुष्प्रभाव अधिक दिखाई देने से अधिकतर लोग इसे दोष कहने लगे हैं |

|जन्म कुण्डली में इन छ: भावों में मंगल के साथ जितने क्रूर ग्रह बैठे हों मंगल उतना ही दोषपूर्ण होता है जैसे दो क्रूर होने पर दोगुना, चार हों तो चार गुना मंगल का पाप प्रभाव अलग अलग तरीके से छ: भाव में दृष्टिगत होता है साथ ही यह भी ध्यान देने योग्य होता है कि साथ में शुभ ग्रह हों अथवा इस पर शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो प्रभाव में कमी भी आती है | इसके साथ ही इसकी वक्री स्थिति द्वारा भी प्रभाव भिन्न हो जाते हैं | सामान्य रूप से इसके विभिन्न भावों में निम्न प्रकार के प्रभाव हो सकते हैं --

 

लग्न भाव में मंगल

लग्न भाव से व्यक्ति का शरीर, स्वास्थ्य, व्यक्तित्व का विचार किया जाता है l लग्न भाव में मंगल होने से व्यक्ति उग्र एवं क्रोधी होता है.यह मंगल हठी और आक्रमक भी बनाता है l इस भाव में उपस्थित मंगल की चतुर्थ दृष्टि सुख स्थान पर होने से गृहस्थ सुख में कमी आती है l सप्तम दृष्टि जीवन साथी के स्थान पर होने से पति पत्नी में विरोधाभास एवं दूरी बनी रहती है l अष्टम भाव पर मंगल की पूर्ण दृष्टि जीवनसाथी के लिए संकट कारक होता है l

 

द्वितीय भाव में मंगल

भावदीपिका नामक ग्रंथ में द्वितीय भावस्थ मंगल वाले को भी मंगली दोष से पीड़ित बताया गया है l यह भाव कुटुम्ब और धन का स्थान होता है l यह मंगल परिवार और सगे सम्बन्धियों से विरोध पैदा करता है l परिवार में तनाव के कारण पति पत्नी में दूरियां लाता है l इस भाव का मंगल पंचम भाव, अष्टम भाव एवं नवम भाव को देखता है l मंगल की इन भावों में दृष्टि से संतान पक्ष पर विपरीत प्रभाव होता है l भाग्य का फल मंदा होता है l

 

चतुर्थ भाव में मंगल

चतुर्थ स्थान में बैठा मंगल सप्तम, दशम एवं एकादश भाव को देखता है l यह मंगल स्थायी सम्पत्ति देता है परंतु गृहस्थ जीवन को कष्टमय बना देता है l मंगल की दृष्टि जीवनसाथी के गृह में होने से वैचारिक मतभेद बना रहता है l मतभेद एवं आपसी प्रेम का अभाव होने के कारण जीवनसाथी के सुख में कमी लाता है l मंगली दोष के कारण पति-पत्नी के बीच दूरियां बढ़ जाती है और दोष निवारण नहीं होने पर अलगाव भी हो सकता है l यह मंगल जीवनसाथी को संकट में डालता है l

 

सप्तम भाव में मंगल

सप्तम भाव जीवनसाथी का घर होता है l इस भाव में बैठा मंगल वैवाहिक जीवन के लिए सर्वाधिक दोषपूर्ण माना जाता है l इस भाव में मंगली दोष होने से जीवनसाथी के स्वास्थ्य में उतार चढ़ाव बना रहता है l जीवनसाथी उग्र एवं क्रोधी स्वभाव का होता है l यह मंगल लग्न स्थान, धन स्थान एवं कर्म स्थान पर पूर्ण दृष्टि डालता है l मंगल की दृष्टि के कारण आर्थिक संकट, व्यवसाय एवं रोजगार में हानि एवं दुर्घटना की संभावना बनती है l यह मंगल चारित्रिक दोष उत्पन्न करता है एवं विवाहेत्तर सम्बन्ध भी बनाता है l संतान के संदर्भ में भी यह कष्टकारी होता है l मंगल के अशुभ प्रभाव के कारण पति पत्नी में दूरियां बढ़ती है जिसके कारण रिश्ते बिखरने लगते हैं l जन्मांग में अगर मंगल इस भाव में मंगली दोष से पीड़ित है तो इसका उपचार कर लेना चाहिए l

 

अष्टम भाव में मंगल

अष्टम स्थान दुख, कष्ट, संकट एवं आयु का घर होता है l इस भाव में मंगल वैवाहिक जीवन के सुख को निगल लेता है l अष्टमस्थ मंगल मानसिक पीड़ा एवं कष्ट प्रदान करने वाला होता है l जीवनसाथी के सुख में बाधक होता है l धन भाव में इसकी दृष्टि होने से धन की हानि और आर्थिक कष्ट होता है l रोग के कारण दाम्पत्य सुख का अभाव होता है l ज्योतिष विधान के अनुसार इस भाव में बैठा अमंलकारी मंगल शुभ ग्रहों को भी शुभत्व देने से रोकता है l इस भाव में मंगल अगर वृष, कन्या अथवा मकर राशि का होता है तो इसकी अशुभता में कुछ कमी आती है l मकर राशि का मंगल होने से यह संतान सम्बन्धी कष्ट देता है।

 

द्वादश भाव में मंगल

कुण्डली का द्वादश भाव शैय्या सुख, भोग, निद्रा, यात्रा और व्यय का स्थान होता है l इस भाव में मंगल की उपस्थिति से मंगली दोष लगता है l इस दोष के कारण पति-पत्नी के सम्बन्ध में प्रेम व सामंजस्य का अभाव होता है l धन की कमी के कारण पारिवारिक जीवन में परेशानियां आती हैं l व्यक्ति में काम की भावना प्रबल रहती है l अगर ग्रहों का शुभ प्रभाव नहीं हो तो व्यक्ति में चारित्रिक दोष भी हो सकता है l भावावेश में आकर जीवनसाथी को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं l इनमें गुप्त रोग व रक्त सम्बन्धी दोष की भी संभावना रहती है l

 

अपवाद के रूप में मांगलिक दोष योग वाले जातक मंगल के प्रभाव के कारण अत्यधिक धैर्यशाली उत्साही और प्रभावशाली देखे जा सकते हैं l बहुत से लोगों के द्वारा मांगलिक दोष के कारण आम लोगों को भय दिखाकर गुमराह भी किया जाता है और अक्सर यही कहा जाता है कि मांगलिक दोष के लडके को मांगलिक ही कन्या चाहिए परन्तु यह एक पक्ष है l कई बार लड़का मांगलिक होता है परन्तु लडकी मांगलिक नही होती फिर भी कुछ विशेष योगों और ग्रहों की स्थितियों के कारण मांगलिक दोष भंग हो जाता है l जैसे :-

न मंगली चन्द्रभृगु द्वितीये,न मंगली पश्यति यस्य जीवःl

न मङ्गली केन्द्रगते च राहु, न मङ्गली मङ्गलराहु योगे ll

कुण्डली में मंगल दोष होने के कारण विवाह में विलम्ब की सम्भावना रहती है और जल्दी कहीं बात नहीं बन पाती l ऐसी स्थिति में मंगल चण्डिका स्तोत्र का पाठ और मंगल जप बराबर करते रहना चाहिए l इन योगों से डरना नहीं चाहिए अपितु समयानुसार उपचार करवा लेना उचित होता है l

उपाय :-

1. मंगल मन्त्र का जप

2. कुम्भ विवाह

3. सावित्री पूजन

4. मंगल गौरि वट पूजन

5. शिव-पार्वती उपासना

उचित मार्गदर्शन के लिए आप मन्त्र साधना ज्योतिष पीठ में सम्पर्क कर सकते हैं l आपकी  मांगलिक कुंडली का विश्लेषण और उपाय आप विस्तृत रूप में जान पाएंगे l

सम्पर्क Astrologer Dr.Naveen Sharma

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